आजमगढ़ में भारतीय राष्ट्र निर्माण और महात्मा गांधी पर संगोष्ठी हुई सम्पन्न ….

आजमगढ़ में भारतीय राष्ट्र निर्माण और महात्मा गांधी पर संगोष्ठी हुई सम्पन्न ….

आज़मगढ़ जिले के सगड़ी तहसील के मॉलटारी बाजार में स्थित श्री गांधी पी जी कालेज के प्रांगण में सोमवार को भारतीय राष्ट्र निर्माण में महात्मा गांधी का योगदान नामक विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया ।
महात्मा गांधी काशी विद्या पीठ वाराणसी से आये हुए मुख्य वक्ता के रूप में डॉ0 सतीश राय , राजीव गांधी स्टडी सर्किल के राष्ट्रीय समन्वयक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी ने अपने संबोधन में कहा कि- महात्मा गांधी भारतीय राष्ट्र की अनमोल विचारधाराओं के संगम थे ।
उन्होंने कहाकि महात्मा गांधी द्वारा राष्ट्र निर्माण में उनकी विचारधारा उनके सिद्धांत ,सत्य ,अहिंसा सर्वोपरि है । महात्मा गांधी द्वारा सत्याग्रह व असहयोग आंदोलन प्रथम राष्ट्रीय जन जागरण बना ! महात्मा गांधी का जीवन आम इंसानों के लिए प्रेरणा स्रोत रहा ! उन्होंने भारत भ्रमण कर करमचंद गांधी से महात्मा गांधी तक का सफर कर गांधीवाद उत्पन्न किया ! एक साथ एक मंच पर अलग-अलग विचारधाराओं के होने के बावजूद भी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ,सुभाष चंद्र बोस ,महात्मा गांधी को मान-सम्मान देते पहली बार सुभाष चंद्र बोस ने ही महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का संबोधन किया।
अन्य वक्ताओं में नितेश जायसवाल , पंकज गौतम ने भी संबोधित किया ! कार्यक्रम का संचालन डॉ० हसीन खान, अध्यक्षता राजा राम सिंह ने किया ! सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया, प्राचार्य राम अवध यादव व कार्यक्रम के आयोजक ओमप्रकाश राय के द्वारा मुख्य अतिथि डॉक्टर सतीश राय का माल्यार्पण कर अंग वस्त्र व महात्मा गांधी का प्रतीक सूत देकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान कार्यक्रम संयोजक जनहित संघर्ष समिति संयोजक ओमप्रकाश राय ने कहा कि- महात्मा गांधी का एक ऐसा व्यक्तित्व रहा जिसने देश का इतिहास ही बदल दिया। उनका आचरण प्रयोजनवादी विचारधारा से ओतप्रोत था । संसार के अधिकांश लोग उन्हें महान राजनीतिज्ञ एवं समाज सुधारक के रूप में जानते हैं। पर उनका यह मानना था कि सामाजिक उन्नति हेतु शिक्षा का एक मत्वपूर्ण योगदान होता है।
अतः गांधीजी का शिक्षा के क्षेत्र में भी विशेष योगदान रहा है। उनका मूलमंत्र था – ‘शोषण-विहीन समाज की स्थापना करना’। उसके लिए सभी को शिक्षित होना चाहिए। क्योंकि शिक्षा के अभाव में एक स्वस्थ समाज का निर्माण असंभव है । अतः गांधीजी ने जो शिक्षा के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों की व्याख्या की, तथा प्रारंभिक शिक्षा योजना उनके शिक्षादर्शन का मूर्त रूप है । अतएव उनका शिक्षादर्शन उनको एक शिक्षाशास्त्री के रूप में भी समाज के सामने प्रस्तुत करता है।
उनका शिक्षा के प्रति जो योगदान था वह अद्वितीय था । उनका मानना था कि मेरे प्रिय भारत में बच्चों को 3H की शिक्षा अर्थात् head hand heart की शिक्षा दी जाए । शिक्षा उन्हें स्वावलंबी बनाये और वे देश को मतबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
इस अवसर पर मुख्य रूप से छात्रसंघ अध्यक्ष आशीष यादव, छात्रनेता सत्यम चौबे, दीपक राय, रमेश राय, डॉ० प्रेमचंद ,डॉ० कौशलेंद्र विक्रम मिश्र,डॉ० अखिलेश चन्द्र, डॉ० विभा राय, छात्र नेता सूरज कुमार, इंद्रभूषण यादव, लालमन यादव, मुकेश सिंह पटेल,अँजेश यादव, राघवेंद्र, राजेश राय, सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं व अध्यापक गण उपस्थित रहे।

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