ब्रिटिश बिद्रोही भर जाति का मूल अस्तित्व लिखित रूप में  समाप्त

ब्रिटिश बिद्रोही भर जाति का मूल अस्तित्व लिखित रूप में  समाप्त किया तहसीलदार कादीपुर सुलतानपुर
जनपद सुल्तानपुर ,के तहसील कादीपुर में पुश्तैनी  रूप से निवासरत विदेशी आक्रांता/ब्रिटिश बिद्रोही मार्शल कौम भर Bhar जाति के वास्तविक वजूद/अस्तित्व को ही वर्तमान  तहसील  प्रशासन कादीपुर ने तानाशाहीपूर्ण तुगलकी फरमान जारी कर एक नए सिरे से खारिज कर  संवैधानिक अधिकारों के हनन का गंभीर संकट पैदा कर स्थिति भयावह पैदा कर दी है ! यह पूर्णतः स्पष्ट है कि भारत की मूलतः भर जाति जिसका पर्याय राजभर भी है पीढ़ी दर पीढ़ी इस जनपद के मूलनिवासी हैं जिसका प्रामाणिक साक्ष्य जनपद सुल्तानपुर में इस जाति के पूर्वजों का विस्तृत सशक्त गौरवशाली इतिहास,सरकारी गजेटियर/अभिलेख साहित्य,सहित पुराने कोट ,किले ,खंडहर के अवशेष आदि विस्तृत रूप से वर्णित है !इतना ही नहीं वर्तमान में ग्राम सजमपुर,भियुरा,मीरपुर प्रतापपुर,भेलारा ,कोहरा,हरपुर,रुपईपुर ,आदि में निर्वाचित कई बार से  ग्राम प्रधान व पूर्व प्रधान भी हैं जिनका जाति प्रमाणपत्र भी भर जाति के नाम से संविधान लागू होने के बाद जबसे शासनादेश जारी हुआ है तबसे बनता आ रहा है तथा कितने लोग नौकरी पेशा में भी जाति/निवास  प्रमाणपत्र भर या राजभर के नाम से सुविधानुसार नियमो के तहत बनवाये हैं !और उनके कुटुम्ब रजिस्टर ,ख़ातिऔनी,जोतबही,शैक्षिक प्रमाणपत्रों आदि में पुराने व नए अभिलेखों में  भर ही जाति अंकित है !
तमाम साक्ष्यों के आधार पर उ प्र  शासन ने भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार राज्य पिछड़ावर्ग आयोग की संस्तुति के तहत 15 सितम्बर 1997 की अधिसूचना के अनुसार 25 अप्रैल 2000 को *मूल भर जाति के साथ उसकी पर्याय synonyms राजभर जाति की नवीन प्रविष्टि कर सम्पूर्ण उ प्र में भर/राजभर जाति को प्रदेश की ओ बी सी की जातियों की सूची में श्रेणीबद्ध कर शासनादेश निर्गत किया है जिसके अनुपालन में प्रदेश के समस्त जनपदों में भर अथवा राजभर के नाम से कांस्टीट्यूशनल सिड्यूल ओ बी सी का जाति प्रमाणपत्र जारी होता है ! सूच्य है कि ओ बी सी की जातियों की सूची में शामिल कुछ जातियाँ अनकांस्टीट्यूशनल सिड्यूल विमुक्त जाति (डीनोटिफाइड ट्राइब्स) में भी हैं जिसमे भर जाति भी सूचीबद्ध है ! फिर भी तहसीलदार द्वारा कर्मचारियों पर अनैतिक दबाब बनाकर यह जानते हुए भी की इस तहसील में  किसी भी ग्राम में कोई भी भर  यह जाति नहीं पाई जाती है सिर्फ राजभर पाए जाते हैं जबकि इसी भर के नाम से 1958 से आजतक काफी जाति/निवास प्रमाणपत्र  बने है जिन्हें मांगकर निरस्त किया जा रहा है और स्थानीय लेखपाल/कानूनगो जानबूझकर दूषित मानसिकता से कुछ तथाकथित  उच्चाधिकारियों व राजनेताओं के अनैतिक दबाव में आकर प्रमाणपत्र नहीं दे रहे है और आमजनता व शासन को भ्रामक त्रुटिपूर्ण आख्या/सूचना  देकर अनवरत गुमराह कर रहे हैं ! जिससे आम  जनता में अपने संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति हेतु संसय व आक्रोश की भावना बलवती होती जा रही है तथा किसी भी समय स्थिति विस्फोटक हो सकती है जिसकी पूरी जिम्मेदारी तहसील प्रशासन की होगी ! फिर भी प्रकरण की गंभीरता व संवेदनशीलता को दृष्टिगत मामला शासन को सन्दर्भित है ! जबकि मेरा सभी प्रामाणिक साक्ष्यों सहित प्रमुख सचिव पिछड़ावर्ग ,अनुभाग अधिकारी शासन व ,निदेशालय स्तर पर सक्षम अधिकारियों से वार्ता व  लगातार लिखित व मौखिक रूप से संपर्क जारी है जल्द ही मामला निर्णित होगा और परिणाम दुखद होने की उम्मीद है ।
*ब्यूरो रिपोर्ट इंद्रपाल राजभर CIB इंडिया न्यूज़ सुल्तानपुर*

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